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IT की नौकरी छोड़ी, गांव लौटे युवा… अब गोबर से गढ़ रहे गणेश

मलगांव के सागर, अभिषेक और भावेश की अनूठी पहल; 50×50 फीट के शेड में तैयार हो रहीं गौमय गणेश प्रतिमाएं,

IT की नौकरी छोड़ी, गांव लौटे युवा… अब गोबर से गढ़ रहे गणेश

मलगांव के सागर, अभिषेक और भावेश की अनूठी पहल; 50×50 फीट के शेड में तैयार हो रहीं गौमय गणेश प्रतिमाएं,
विधायक छाया मोरे ने खुद खरीदी प्रतिमा
विधायक बोलीं—सिर्फ प्रतिमा तक सीमित न रहें युवा, पंचगव्य उत्पादों की ओर बढ़ें;
महिलाओं और बालिकाओं को भी प्रशिक्षण देने की जरूरत, शासन स्तर पर सहयोग का प्रयास करूंगी।

खंडवा। रोजगार की तलाश में शहरों की ओर जाने वाले युवाओं के बीच मलगांव के तीन युवाओं ने अलग राह चुनी है। IT क्षेत्र की नौकरी छोड़कर गांव लौटे सागर पटेल, अभिषेक राठौर और भावेश राठौर ने पुश्तैनी जमीन पर जैविक खेती से शुरुआत की और अब गाय के गोबर से भगवान गणेश की पर्यावरण हितैषी प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। करीब 50×50 फीट के शेड में चल रहा यह प्रयोग अब केवल तीन युवाओं तक सीमित नहीं है। परिवार की महिलाएं प्रतिमा निर्माण में हाथ बंटा रही हैं, जबकि बच्चे रंग-रोगन और सजावट में सहयोग कर रहे हैं। समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि इस अनूठी पहल को उस समय खास प्रोत्साहन मिला, जब पंधाना विधायक एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता छाया गोविन्द मोरे स्वयं अनाज मंडी पहुंचीं और युवाओं द्वारा तैयार की जा रही गौमय गणेश प्रतिमा अपने परिवार के लिए खरीदी। उन्होंने युवाओं के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य केवल प्रतिमा बनाकर लाभ कमाना नहीं, बल्कि जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों की ओर युवाओं और समाज को प्रेरित करना है।
नौकरी छोड़ी, गांव को बनाया प्रयोग की जमीन
सागर पटेल, अभिषेक राठौर और भावेश राठौर ने IT क्षेत्र में नौकरी की है। शहर की नौकरी और करियर की संभावनाओं के बीच तीनों ने गांव लौटने का निर्णय लिया। पुश्तैनी जमीन पर जैविक खेती शुरू की और खेती में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को लेकर प्रयोग शुरू किए।
रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने का काम शुरू हुआ। इसी दौरान गाय के गोबर की उपयोगिता को लेकर नए प्रयोग किए गए। खेती में उपयोग होने वाला यही प्राकृतिक संसाधन आगे चलकर भगवान गणेश की प्रतिमा का आधार बना।
गोबर से गणेश बनाने का शुरू किया प्रयोग
गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण हितैषी विकल्प उपलब्ध कराने की सोच के साथ युवाओं ने गाय के गोबर से गणेश प्रतिमा तैयार करने का प्रयोग शुरू किया। शुरुआती स्तर पर प्रक्रिया को समझा गया और कई प्रयोगों के बाद प्रतिमाओं को आकार देने का काम आगे बढ़ा।
युवाओं ने प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कुछ मशीनें भी अपने स्तर पर तैयार की हैं। उनका प्रयास है कि प्राकृतिक संसाधनों से ऐसे उत्पाद तैयार किए जाएं, जिनमें परंपरा, आस्था और पर्यावरण संरक्षण तीनों का समन्वय हो।
50×50 फीट के शेड में बन रहा नया मॉडल
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि मलगांव में करीब 50×50 फीट के शेड में गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। गोबर को आवश्यक प्रक्रिया से तैयार करने के बाद प्रतिमाओं को आकार दिया जाता है। इसके बाद उन्हें अंतिम स्वरूप, रंग और सजावट दी जाती है।
इस काम में परिवार भी सहभागी बन गया है। महिलाएं प्रतिमाओं को तैयार करने में सहयोग कर रही हैं, जबकि बच्चे रंग-रोगन और सजावट में हाथ बंटा रहे हैं। इससे यह प्रयोग परिवार के लिए स्वरोजगार और रचनात्मक काम का माध्यम भी बन रहा है।
विधायक छाया मोरे ने खुद खरीदी गणेश प्रतिमा
मलगांव के युवाओं की पहल की जानकारी मिलने पर पंधाना विधायक छाया गोविन्द मोरे रविवार को खंडवा की अनाज मंडी पहुंचीं। उन्होंने गौमय गणेश प्रतिमाओं को देखा और अपने परिवार के लिए एक प्रतिमा खरीदी।
विधायक ने कहा कि गौ माता का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है और परंपरागत रूप से शुभ कार्यों में गोबर का उपयोग होता रहा है। ऐसे में गोबर से गणेश प्रतिमा तैयार करने का प्रयास आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है।
उन्होंने युवाओं के IT की नौकरी छोड़कर गांव लौटने और प्राकृतिक संसाधनों के साथ काम शुरू करने की सोच को भी सराहा।
‘लाभ कमाना ही उद्देश्य नहीं’
विधायक छाया मोरे ने कहा कि इन तीन युवाओं का उद्देश्य केवल प्रतिमा तैयार कर आर्थिक लाभ कमाना नहीं है। उनका उद्देश्य अपने गांव और जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश और देश को जैविक खेती तथा प्राकृतिक संसाधनों की ओर प्रेरित करना है।
उन्होंने बताया कि युवाओं ने IT क्षेत्र की नौकरी छोड़कर फिलहाल इसे प्रयोग और ट्रायल के रूप में शुरू किया है। अब वे अपने गांव की वर्कशॉप में क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं, ताकि आने वाले समय में अधिक युवा इस तरह के गौमय और प्राकृतिक उत्पाद तैयार कर सकें तथा इन्हें व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ा सकें।
‘प्रतिमा तक सीमित न रहें, पंचगव्य उत्पादों की ओर बढ़ें’
विधायक ने युवाओं को सुझाव दिया कि उनका काम केवल जैविक खाद, जैविक खेती और गणेश प्रतिमाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आगे चलकर पंचगव्य आधारित विभिन्न उत्पादों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गौ माता के गोबर से अगरबत्ती, विभिन्न उपयोगी सामग्री और अन्य प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। युवाओं को स्वयं ऐसे उत्पाद तैयार करने के साथ क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी इसकी जानकारी और प्रशिक्षण देना चाहिए।
महिलाओं और बालिकाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर
छाया मोरे ने विशेष रूप से महिलाओं और बालिकाओं को इस तरह के काम से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित छोटे-छोटे उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण महिलाओं और बालिकाओं को दिया जाए तो वे घर या गांव में रहते हुए भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि वे इस पहल को लेकर शासन स्तर पर भी चर्चा करेंगी और आवश्यकता होने पर युवाओं को शासन स्तर से आवश्यक सहयोग दिलाने का प्रयास करेंगी।
अब वर्कशॉप में दूसरे युवाओं को भी प्रशिक्षण
मलगांव में चल रहा यह काम अब केवल गणेश प्रतिमा निर्माण तक सीमित नहीं है। युवाओं द्वारा अपनी वर्कशॉप में क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी इस तरह के उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है।
इससे एक व्यक्ति के रोजगार से आगे बढ़कर स्थानीय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण और रोजगार का मॉडल तैयार होने की संभावना बन रही है।
आटे के दीपक भी तैयार कर रहे
गौमय गणेश प्रतिमाओं के अलावा युवा आटे से पर्यावरण हितैषी दीपक भी तैयार कर रहे हैं। नर्मदा सहित अन्य पवित्र नदियों में दीपदान के लिए इनका उपयोग किया जा सकता है। ये दीपक ओंकारेश्वर के नर्मदा घाटों पर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस तरह जैविक खेती से शुरू हुआ प्रयोग अब गोबर से गणेश और आटे से दीपक तक पहुंच चुका है।
अनाज मंडी में श्रद्धालुओं को मिलेंगी गौमय प्रतिमाएं
इस गणेश उत्सव में मलगांव में तैयार की जा रही गौमय गणेश प्रतिमाएं खंडवा की अनाज मंडी में लगने वाले प्रतिमा स्टॉल पर श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहेंगी।
युवाओं के लिए यह अपने प्रयोग को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का अवसर है। उनका उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण हितैषी प्रतिमाओं का विकल्प मिले और आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी आगे बढ़े।
गोबर को कचरा नहीं, संसाधन मानने की सोच
इन युवाओं की पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने गोबर को केवल पारंपरिक उपयोग तक सीमित नहीं रखा। जैविक खेती के लिए वर्मी कम्पोस्ट से लेकर गणेश प्रतिमा और अन्य प्राकृतिक उत्पादों तक, वे इसके अलग-अलग उपयोग तलाश रहे हैं।
उनकी सोच है कि गांव में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।
शहर से गांव और नौकरी से स्वरोजगार तक
सागर, अभिषेक और भावेश की कहानी केवल IT नौकरी छोड़ने की कहानी नहीं है। यह काम की दिशा बदलने और स्थानीय संसाधनों में संभावनाएं तलाशने की कहानी भी है।
IT क्षेत्र का अनुभव लेकर गांव लौटे इन युवाओं ने जैविक खेती को आधार बनाया। वर्मी कम्पोस्ट से शुरुआत हुई और प्रयोग करते-करते गोबर से गणेश प्रतिमाओं का निर्माण शुरू हुआ। अब वे दूसरे युवाओं को प्रशिक्षण देने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
विधायक के समर्थन से बढ़ी उम्मीद
विधायक छाया मोरे द्वारा स्वयं गौमय गणेश प्रतिमा खरीदना इस पहल के लिए महत्वपूर्ण प्रोत्साहन माना जा रहा है। उन्होंने न केवल युवाओं के प्रयोग की सराहना की, बल्कि इसे आगे बढ़ाकर पंचगव्य उत्पाद, कौशल प्रशिक्षण, महिला स्वरोजगार और शासन स्तर के संभावित सहयोग से जोड़ने की बात भी कही है।
मलगांव का यह प्रयोग अब एक सवाल भी सामने रखता है—क्या गांव के प्राकृतिक संसाधन युवाओं के लिए नए रोजगार का आधार बन सकते हैं?
इन तीन युवाओं का प्रयास इसका जवाब तलाशता नजर आता है।
IT की नौकरी से जैविक खेती तक…
जैविक खेती से वर्मी कम्पोस्ट तक…
वर्मी कम्पोस्ट से गोबर के गणेश तक…
और अब पंचगव्य उत्पादों व युवाओं के प्रशिक्षण की ओर बढ़ता यह सफर मलगांव से निकलकर बड़ी संभावना की ओर संकेत कर रहा है।

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